देखो, यह सामने बैठा हुआ नन्दरायका लाड़ला सबसे पहले तो बच्चोंके लिये कालस्वरूपिणी हत्यारी पूतनाके चंगुलसे किसी प्रकार छूटा। इसके बाद भगवान्की दूसरी कृपा यह हुई कि इसके ऊपर उतना बड़ा छकड़ा गिरते गिरते बचा॥ २४॥
मुक्तः कथंचिद् राक्षस्या बालघ्न्या बालको ह्यसौ।
हरेरनुग्रहान्नूनमनश्चोपरि नापतत्॥ २४
देखो, यह सामने बैठा हुआ नन्दरायका लाड़ला सबसे पहले तो बच्चोंके लिये कालस्वरूपिणी हत्यारी पूतनाके चंगुलसे किसी प्रकार छूटा। इसके बाद भगवान्की दूसरी कृपा यह हुई कि इसके ऊपर उतना बड़ा छकड़ा गिरते गिरते बचा॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.11.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 198) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/11/24/