श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.44

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

तं वीक्ष्य विस्मिता बालाः शशंसुः साधु साध्विति।

देवाश्‍च परिसन्तुष्टा बभूवुः पुष्पवर्षिणः॥ ४४

taṃ vīkṣya vismitā bālāḥ śaśaṃsuḥ sādhu sādhviti|

devāśca parisantuṣṭā babhūvuḥ puṣpavarṣiṇaḥ|| 44

अर्थ

यह देखकर ग्वालबालोंके आश्‍चर्यकी सीमा न रही। वे ‘वाह-वाह’ करके प्यारे कन्हैयाकी प्रशंसा करने लगे। देवता भी बड़े आनन्दसे फूलोंकी वर्षा करने लगे॥ ४४॥

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