॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.12.20
सत्यमर्ककरारक्तमुत्तराहनुवद् घनम्।
अधराहनुवद् रोधस्तत्प्रतिच्छाययारुणम्॥ २०
satyamarkakarāraktamuttarāhanuvad ghanam|
adharāhanuvad rodhastatpraticchāyayāruṇam|| 20
अर्थ
दूसरेने कहा—‘सचमुच सूर्यकी किरणें पड़नेसे ये जो बादल लाल-लाल हो गये हैं, वे ऐसे मालूम होते हैं मानो ठीक-ठीक इसका ऊपरी होठ ही हो। और उन्हीं बादलोंकी परछाईंसे यह जो नीचेकी भूमि कुछ लाल-लाल दीख रही है, वही इसका नीचेका होठ जान पड़ता है’॥ २०॥