महायोगी गुरुदेव! मुझे इस आश्चर्यपूर्ण रहस्यको जाननेके लिये बड़ा कौतूहल हो रहा है। आप कृपा करके बतलाइये। अवश्य ही इसमें भगवान् श्रीकृष्णकी विचित्र घटनाओंको घटित करनेवाली मायाका कुछ-न-कुछ काम होगा। क्योंकि और किसी प्रकार ऐसा नहीं हो सकता॥ ४२॥
तद् ब्रूहि मे महायोगिन् परं कौतूहलं गुरो।
नूनमेतद्धरेरेव माया भवति नान्यथा॥ ४२
महायोगी गुरुदेव! मुझे इस आश्चर्यपूर्ण रहस्यको जाननेके लिये बड़ा कौतूहल हो रहा है। आप कृपा करके बतलाइये। अवश्य ही इसमें भगवान् श्रीकृष्णकी विचित्र घटनाओंको घटित करनेवाली मायाका कुछ-न-कुछ काम होगा। क्योंकि और किसी प्रकार ऐसा नहीं हो सकता॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.12.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 209) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/12/42/