परीक्षित्! जिस ग्वालबालके जो बछड़े थे, उन्हें उसी ग्वालबालके रूपसे अलग-अलग ले जाकर उसकी बाखलमें घुसा दिया और विभिन्न बालकोंके रूपमें उनके भिन्न-भिन्न घरोंमें चले गये॥ २१॥✎ 14192069
तत्तद्वत्सान् पृथङ्नीत्वा तत्तद्गोष्ठे निवेश्य सः।
तत्तदात्माभवद् राजंस्तत्तत्सद्म प्रविष्टवान्॥ २१
परीक्षित्! जिस ग्वालबालके जो बछड़े थे, उन्हें उसी ग्वालबालके रूपसे अलग-अलग ले जाकर उसकी बाखलमें घुसा दिया और विभिन्न बालकोंके रूपमें उनके भिन्न-भिन्न घरोंमें चले गये॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.13.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 213) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/13/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)