tasyāpi bhagavān kṛṣṇaḥ kimatad vastu rūpyatām|| 57
अर्थ
सभी वस्तुओंका अन्तिम रूप अपने कारणमें स्थित होता है। उस कारणके भी परम कारण हैं भगवान् श्रीकृष्ण। तब भला बताओ, किस वस्तुको श्रीकृष्णसे भिन्न बतलायें॥ ५७॥
सर्वेषामपि वस्तूनां भावार्थो भवति स्थितः।
तस्यापि भगवान् कृष्णः किमतद् वस्तु रूप्यताम्॥ ५७
सभी वस्तुओंका अन्तिम रूप अपने कारणमें स्थित होता है। उस कारणके भी परम कारण हैं भगवान् श्रीकृष्ण। तब भला बताओ, किस वस्तुको श्रीकृष्णसे भिन्न बतलायें॥ ५७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.14.57 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 230) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/14/57/