gāyanti sma mahārāja snehaklinnadhiyaḥ śanaiḥ|| 18
अर्थ
किसी-किसीके हृदयमें प्रेमकी धारा उमड़ आती तो वह धीरे-धीरे उदारशिरोमणि परममनस्वी श्रीकृष्णकी लीलाओंके अनुरूप उनके मनको प्रिय लगनेवाले मनोहर गीत गाने लगता॥ १८॥
अन्ये तदनुरूपाणि मनोज्ञानि महात्मनः।
गायन्ति स्म महाराज स्नेहक्लिन्नधियः शनैः॥ १८
किसी-किसीके हृदयमें प्रेमकी धारा उमड़ आती तो वह धीरे-धीरे उदारशिरोमणि परममनस्वी श्रीकृष्णकी लीलाओंके अनुरूप उनके मनको प्रिय लगनेवाले मनोहर गीत गाने लगता॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.15.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 234) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/15/18/