na sevyate paśugaṇaiḥ pakṣisaṃghairvivarjitam|| 24
अर्थ
मेरे शत्रुघाती भैया! उस दैत्यने अबतक न जाने कितने मनुष्य खा डाले हैं। यही कारण है कि उसके डरके मारे मनुष्य उसका सेवन नहीं करते और पशु-पक्षी भी उस जंगलमें नहीं जाते॥ २४॥
तस्मात् कृतनराहाराद् भीतैर्नृभिरमित्रहन्।
न सेव्यते पशुगणैः पक्षिसंघैर्विवर्जितम्॥ २४
मेरे शत्रुघाती भैया! उस दैत्यने अबतक न जाने कितने मनुष्य खा डाले हैं। यही कारण है कि उसके डरके मारे मनुष्य उसका सेवन नहीं करते और पशु-पक्षी भी उस जंगलमें नहीं जाते॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.15.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 234) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/15/24/