श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.15.32

दशम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

स तं गृहीत्वा प्रपदोर्भ्रामयित्वैकपाणिना।

चिक्षेप तृणराजाग्रे भ्रामणत्यक्तजीवितम्॥ ३२

sa taṃ gṛhītvā prapadorbhrāmayitvaikapāṇinā|

cikṣepa tṛṇarājāgre bhrāmaṇatyaktajīvitam|| 32

अर्थ

बलरामजीने अपने एक ही हाथसे उसके दोनों पैर पकड़ लिये और उसे आकाशमें घुमाकर एक ताड़के पेड़पर दे मारा। घुमाते समय ही उस गधेके प्राणपखेरू उड़ गये थे॥ ३२॥

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