श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.15.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

नैतच्चित्रं भगवति ह्यनन्ते जगदीश्‍वरे।

ओतप्रोतमिदं यस्मिंस्तन्तुष्वंग यथा पटः॥ ३५

naitaccitraṃ bhagavati hyanante jagadīśvare|

otaprotamidaṃ yasmiṃstantuṣvaṃga yathā paṭaḥ|| 35

अर्थ

भगवान् बलराम स्वयं जगदीश्‍वर हैं। उनमें यह सारा संसार ठीक वैसे ही ओतप्रोत है, जैसे सूतोंमें वस्त्र। तब भला, उनके लिये यह कौन आश्‍चर्यकी बात है॥ ३५॥

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