श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.15.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

फलप्रकरसंकीर्णं दैत्यदेहैर्गतासुभिः।

रराज भूः सतालाग्रैर्घनैरिव नभस्तलम्॥ ३८

phalaprakarasaṃkīrṇaṃ daityadehairgatāsubhiḥ|

rarāja bhūḥ satālāgrairghanairiva nabhastalam|| 38

अर्थ

उस समय वह भूमि ताड़के फलोंसे पट गयी और टूटे हुए वृक्ष तथा दैत्योंके प्राणहीन शरीरोंसे भर गयी। जैसे बादलोंसे आकाश ढक गया हो, उस भूमिकी वैसी ही शोभा होने लगी॥ ३८॥

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