श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.15.52

दशम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

अन्वमंसत तद् राजन् गोविन्दानुग्रहेक्षितम्।

पीत्वा विषं परेतस्य पुनरुत्थानमात्मनः॥ ५२

anvamaṃsata tad rājan govindānugrahekṣitam|

pītvā viṣaṃ paretasya punarutthānamātmanaḥ|| 52

अर्थ

राजन्! अन्तमें उन्होंने यही निश्‍चय किया कि हमलोग विषैला जल पी लेनेके कारण मर चुके थे, परन्तु हमारे श्रीकृष्णने अपनी अनुग्रहभरी दृष्टिसे देखकर हमें फिरसे जिला दिया है॥ ५२॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे पूर्वार्धे
धेनुकवधो नाम पञ्चदशोऽध्यायः॥ १५॥

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