श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.16.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

तैर्दुर्निमित्तैर्निधनं मत्वा प्राप्तमतद्विदः।

तत्प्राणास्तन्मनस्कास्ते दुःखशोकभयातुराः॥ १४

tairdurnimittairnidhanaṃ matvā prāptamatadvidaḥ|

tatprāṇāstanmanaskāste duḥkhaśokabhayāturāḥ|| 14

अर्थ

वे भगवान्‌का प्रभाव नहीं जानते थे। इसीलिये उन अशकुनोंको देखकर उनके मनमें यह बात आयी कि आज तो श्रीकृष्णकी मृत्यु ही हो गयी होगी। वे उसी क्षण दुःख, शोक और भयसे आतुर हो गये। क्यों न हों, श्रीकृष्ण ही उनके प्राण, मन और सर्वस्व जो थे॥ १४॥

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