श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.16.53

दशम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

विधेहि ते किंकरीणामनुष्ठेयं तवाज्ञया।

यच्छ्रद्धयानुतिष्ठन् वै मुच्यते सर्वतोभयात्॥ ५३

vidhehi te kiṃkarīṇāmanuṣṭheyaṃ tavājñayā|

yacchraddhayānutiṣṭhan vai mucyate sarvatobhayāt|| 53

अर्थ

हम आपकी दासी हैं। हमें आप आज्ञा दीजिये, आपकी क्या सेवा करें? क्योंकि जो श्रद्धाके साथ आपकी आज्ञाओंका पालन—आपकी सेवा करता है, वह सब प्रकारके भयोंसे छुटकारा पा जाता है॥ ५३॥

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