श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.16.61

दशम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

य एतत् संस्मरेन्मर्त्यस्तुभ्यं मदनुशासनम्।

कीर्तयन्‍नुभयोः सन्ध्योर्न युष्मद् भयमाप्नुयात्॥ ६१

ya etat saṃsmarenmartyastubhyaṃ madanuśāsanam|

kīrtayannubhayoḥ sandhyorna yuṣmad bhayamāpnuyāt|| 61

अर्थ

जो मनुष्य दोनों समय तुझको दी हुई मेरी इस आज्ञाका स्मरण तथा कीर्तन करे, उसे साँपोंसे कभी भय न हो॥ ६१॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें