‘यदि गरुड फिर कभी इस कुण्डमें घुसकर मछलियोंको खायेंगे, तो उसी क्षण प्राणोंसे हाथ धो बैठेंगे। मैं यह सत्य-सत्य कहता हूँ’॥ ११॥
अत्र प्रविश्य गरुडो यदि मत्स्यान् स खादति।
सद्यः प्राणैर्वियुज्येत सत्यमेतद् ब्रवीम्यहम्॥ ११
‘यदि गरुड फिर कभी इस कुण्डमें घुसकर मछलियोंको खायेंगे, तो उसी क्षण प्राणोंसे हाथ धो बैठेंगे। मैं यह सत्य-सत्य कहता हूँ’॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.17.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 250) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/17/11/