श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.17.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

तदा शुचिवनोद्भूतो दावाग्‍निः सर्वतो व्रजम्।

सुप्तं निशीथ आवृत्य प्रदग्धुमुपचक्रमे॥ २१

tadā śucivanodbhūto dāvāgniḥ sarvato vrajam|

suptaṃ niśītha āvṛtya pradagdhumupacakrame|| 21

अर्थ

गर्मीके दिन थे, उधरका वन सूख गया था। आधी रातके समय उसमें आग लग गयी। उस आगने सोये हुए व्रजवासियोंको चारों ओरसे घेर लिया और वह उन्हें जलाने लगी॥ २१॥

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