॥ श्रीहरिः ॥
रामसंघट्टिनो यर्हि श्रीदामवृषभादयः।
क्रीडायां जयिनस्तांस्तानूहुः कृष्णादयो नृप॥ २३
rāmasaṃghaṭṭino yarhi śrīdāmavṛṣabhādayaḥ|
krīḍāyāṃ jayinastāṃstānūhuḥ kṛṣṇādayo nṛpa|| 23
अर्थ
परीक्षित्! एक बार बलरामजीके दलवाले श्रीदामा, वृषभ आदि ग्वालबालोंने खेलमें बाजी मार ली। तब श्रीकृष्ण आदि उन्हें अपनी पीठपर चढ़ाकर ढोने लगे॥ २३॥
रामसंघट्टिनो यर्हि श्रीदामवृषभादयः।
क्रीडायां जयिनस्तांस्तानूहुः कृष्णादयो नृप॥ २३
परीक्षित्! एक बार बलरामजीके दलवाले श्रीदामा, वृषभ आदि ग्वालबालोंने खेलमें बाजी मार ली। तब श्रीकृष्ण आदि उन्हें अपनी पीठपर चढ़ाकर ढोने लगे॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.18.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 255) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/18/23/