॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.20.34
व्योम्नोऽब्दं भूतशाबल्यं भुवः पंकमपां मलम्।
शरज्जहाराश्रमिणां कृष्णे भक्तिर्यथाशुभम्॥ ३४
vyomno'bdaṃ bhūtaśābalyaṃ bhuvaḥ paṃkamapāṃ malam|
śarajjahārāśramiṇāṃ kṛṣṇe bhaktiryathāśubham|| 34
अर्थ
शरद् ऋतुने आकाशके बादल, वर्षा-कालके बढ़े हुए जीव, पृथ्वीकी कीचड़ और जलके मटमैलेपनको नष्ट कर दिया—जैसे भगवान्की भक्ति ब्रह्मचारी, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यासियोंके सब प्रकारके कष्टों और अशुभोंका झटपट नाश कर देती है॥ ३४॥