श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.20.48

दशम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

पुरग्रामेष्वाग्रयणैरैन्द्रियैश्‍च महोत्सवैः।

बभौ भूः पक्वसस्याढ्या कलाभ्यां नितरां हरेः॥ ४८

puragrāmeṣvāgrayaṇairaindriyaiśca mahotsavaiḥ|

babhau bhūḥ pakvasasyāḍhyā kalābhyāṃ nitarāṃ hareḥ|| 48

अर्थ

उस समय बड़े-बड़े शहरों और गाँवोंमें नवान्‍नप्राशन और इन्द्रसम्बन्धी उत्सव होने लगे। खेतोमें अनाज पक गये और पृथ्वी भगवान् श्रीकृष्ण तथा बलरामजीकी उपस्थितिसे अत्यन्त सुशोभित होने लगी॥ ४८॥

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