भगवान् श्रीकृष्णने कहा—कुमारियो! तुम्हारी मुसकान पवित्रता और प्रेमसे भरी है। देखो, जब तुम अपनेको मेरी दासी स्वीकार करती हो और मेरी आज्ञाका पालन करना चाहती हो तो यहाँ आकर अपने-अपने वस्त्र ले लो॥ १६॥
भवत्यो यदि मे दास्यो मयोक्तं वा करिष्यथ।
अत्रागत्य स्ववासांसि प्रतीच्छन्तु शुचिस्मिताः॥ १६
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—कुमारियो! तुम्हारी मुसकान पवित्रता और प्रेमसे भरी है। देखो, जब तुम अपनेको मेरी दासी स्वीकार करती हो और मेरी आज्ञाका पालन करना चाहती हो तो यहाँ आकर अपने-अपने वस्त्र ले लो॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.22.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 272) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/22/16/