श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

तं ब्रह्म परमं साक्षाद् भगवन्तमधोक्षजम्।

मनुष्यदृष्ट्या दुष्प्रज्ञा मर्त्यात्मानो न मेनिरे॥ ११

taṃ brahma paramaṃ sākṣād bhagavantamadhokṣajam|

manuṣyadṛṣṭyā duṣprajñā martyātmāno na menire|| 11

अर्थ

वे ही इन्द्रियातीत परब्रह्म भगवान् श्रीकृष्ण स्वयं ग्वालबालोंके द्वारा भात माँग रहे हैं। परन्तु इन मूर्खोंने, जो अपनेको शरीर ही माने बैठे हैं, भगवान्‌को भी एक साधारण मनुष्य ही माना और उनका सम्मान नहीं किया॥ ११॥

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