॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.24.11
य एवं विसृजेद् धर्मं पारम्पर्यागतं नरः।
कामाल्लोभाद् भयाद् द्वेषात् स वै नाप्नोति शोभनम्॥ ११
ya evaṃ visṛjed dharmaṃ pāramparyāgataṃ naraḥ|
kāmāllobhād bhayād dveṣāt sa vai nāpnoti śobhanam|| 11
अर्थ
यह धर्म हमारी कुलपरम्परासे चला आया है। जो मनुष्य काम, लोभ, भय अथवा द्वेषवश ऐसे परम्परागत धर्मको छोड़ देता है, उसका कभी मंगल नहीं होता॥ ११॥