श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.24.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

इत्यद्रिगोद्विजमखं वासुदेवप्रणोदिताः१।

यथा विधाय ते गोपाः सहकृष्णा व्रजं ययुः॥ ३८

ityadrigodvijamakhaṃ vāsudevapraṇoditāḥ|

yathā vidhāya te gopāḥ sahakṛṣṇā vrajaṃ yayuḥ|| 38

अर्थ

इस प्रकार भगवान् श्रीकृष्णकी प्रेरणासे नन्दबाबा आदि बड़े-बूढ़े गोपोंने गिरिराज, गौ और ब्राह्मणोंका विधिपूर्वक पूजन किया तथा फिर श्रीकृष्णके साथ सब व्रजमें लौट आये॥ ३८॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे
पूर्वार्धे २ चतुर्विंशोऽध्यायः॥ २४॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रचो०।

    (मुद्रित पृष्ठ 293)
  2. २

    इन्द्रमखभंगश्‍चतु०।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 293)

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