श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.25.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

न त्रास इह वः कार्यो मद्धस्ताद्रिनिपातने।

वातवर्षभयेनालं तत्त्राणं विहितं हि वः॥ २१

na trāsa iha vaḥ kāryo maddhastādrinipātane|

vātavarṣabhayenālaṃ tattrāṇaṃ vihitaṃ hi vaḥ|| 21

अर्थ

देखो, तुमलोग ऐसी शंका न करना कि मेरे हाथसे यह पर्वत गिर पड़ेगा। तुमलोग तनिक भी मत डरो। इस आँधी-पानीके डरसे तुम्हें बचानेके लिये ही मैंने यह युक्ति रची है’॥ २१॥

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