श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.25.26

दशम स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

निर्यात त्यजत त्रासं गोपाः सस्त्रीधनार्भकाः।

उपारतं वातवर्षं व्युदप्रायाश्‍च निम्‍नगाः॥ २६

niryāta tyajata trāsaṃ gopāḥ sastrīdhanārbhakāḥ|

upārataṃ vātavarṣaṃ vyudaprāyāśca nimnagāḥ|| 26

अर्थ

‘मेरे प्यारे गोपो! अब तुमलोग निडर हो जाओ और अपनी स्त्रियों, गोधन तथा बच्चोंके साथ बाहर निकल आओ। देखो, अब आँधी-पानी बंद हो गया तथा नदियोंका पानी भी उतर गया’॥ २६॥✎ 885

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #885 शब्दोंके बीचका स्थान: रहगये। → रह गये।

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