श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.25.32

दशम स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

शंखदुन्दुभयो नेदुर्दिवि देवप्रणोदिताः।

जगुर्गन्धर्वपतयस्तुम्बुरुप्रमुखा नृप॥ ३२

śaṃkhadundubhayo nedurdivi devapraṇoditāḥ|

jagurgandharvapatayastumburupramukhā nṛpa|| 32

अर्थ

राजन्! स्वर्गमें देवतालोग शंख और नौबत बजाने लगे। तुम्बुरु आदि गन्धर्वराज भगवान्‌की मधुर लीलाका गान करने लगे॥ ३२॥

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