श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.26.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

अथ षड्विंशोऽध्यायः

नन्दबाबासे गोपोंकी श्रीकृष्णके प्रभावके विषयमें बातचीत

श्रीशुक उवाच

एवंविधानि कर्माणि गोपाः कृष्णस्य वीक्ष्य ते।

अतद्वीर्यविदः प्रोचुः समभ्येत्य सुविस्मिताः॥ १

evaṃvidhāni karmāṇi gopāḥ kṛṣṇasya vīkṣya te|

atadvīryavidaḥ procuḥ samabhyetya suvismitāḥ|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! व्रजके गोप भगवान् श्रीकृष्णके ऐसे अलौकिक कर्म देखकर बड़े आश्‍चर्यमें पड़ गये। उन्हें भगवान्‌की अनन्त शक्तिका तो पता था नहीं, वे इकट्ठे होकर आपसमें इस प्रकार कहने लगे—॥ १॥

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