श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.26.15

दशम स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

नन्द उवाच

श्रूयतां मे वचो गोपा व्येतु शंका च वोऽर्भके।

एनं कुमारमुद्दिश्य गर्गो मे यदुवाच ह॥ १५

śrūyatāṃ me vaco gopā vyetu śaṃkā ca vo'rbhake|

enaṃ kumāramuddiśya gargo me yaduvāca ha|| 15

अर्थ

नन्दबाबाने कहा—गोपो! तुमलोग सावधान होकर मेरी बात सुनो। मेरे बालकके विषयमें तुम्हारी शंका दूर हो जाय। क्योंकि महर्षि गर्गने इस बालकको देखकर इसके विषयमें ऐसा ही कहा था॥ १५॥

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