श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.26.17

दशम स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

प्रागयं वसुदेवस्य क्वचिज्जातस्तवात्मजः।

वासुदेव इति श्रीमानभिज्ञाः सम्प्रचक्षते॥ १७

prāgayaṃ vasudevasya kvacijjātastavātmajaḥ|

vāsudeva iti śrīmānabhijñāḥ sampracakṣate|| 17

अर्थ

नन्दजी! यह तुम्हारा पुत्र पहले कहीं वसुदेवके घर भी पैदा हुआ था, इसलिये इस रहस्यको जाननेवाले लोग ‘इसका नाम श्रीमान् वासुदेव है’—ऐसा कहते हैं॥ १७॥

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