गोपो! मुझे स्वयं गर्गाचार्यजी यह आदेश देकर अपने घर चले गये। तबसे मैं अलौकिक और परम सुखद कर्म करनेवाले इस बालकको भगवान् नारायणका ही अंश मानता हूँ॥ २३॥
इत्यद्धा मां समादिश्य गर्गे च स्वगृहं गते।
मन्ये नारायणस्यांशं कृष्णमक्लिष्टकारिणम्॥ २३
गोपो! मुझे स्वयं गर्गाचार्यजी यह आदेश देकर अपने घर चले गये। तबसे मैं अलौकिक और परम सुखद कर्म करनेवाले इस बालकको भगवान् नारायणका ही अंश मानता हूँ॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.26.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 300) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/26/23/