उस दिनकी बात तो सभी जानते हैं कि माखनचोरी करनेपर यशोदारानीने इसे ऊखलसे बाँध दिया था। यह घुटनोंके बल बकैयाँ खींचते-खींचते उन दोनों विशाल अर्जुन वृक्षोंके बीचमेंसे निकल गया और उन्हें उखाड़ ही डाला॥ ७॥
क्वचिद्धैयंगवस्तैन्ये मात्रा बद्ध उलूखले।
गच्छन्नर्जुनयोर्मध्ये बाहुभ्यां तावपातयत्॥ ७
उस दिनकी बात तो सभी जानते हैं कि माखनचोरी करनेपर यशोदारानीने इसे ऊखलसे बाँध दिया था। यह घुटनोंके बल बकैयाँ खींचते-खींचते उन दोनों विशाल अर्जुन वृक्षोंके बीचमेंसे निकल गया और उन्हें उखाड़ ही डाला॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.26.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 298) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/26/7/