श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.28.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 28 · अथाष्टाविंशोऽध्यायः

ते तु ब्रह्मह्रदं नीता म‌ग्‍नाः कृष्णेन चोद‍्धृताः।✎ 1154

ददृशुर्ब्रह्मणो लोकं यत्राक्रूरोऽध्यगात् पुरा॥ १६

te tu brahmahradaṃ nītā magnāḥ kṛṣṇena coddhṛtāḥ|

dadṛśurbrahmaṇo lokaṃ yatrākrūro'dhyagāt purā|| 16

अर्थ

जिस जलाशयमें अक्रूरको भगवान्‌ने अपना स्वरूप दिखलाया था, उसी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मह्रदमें भगवान् उन गोपोंको ले गये। वहाँ उन लोगोंने उसमें डुबकी लगायी। वे ब्रह्मह्रदमें प्रवेश कर गये। तब भगवान्‌ने उसमेंसे उनको निकालकर अपने परमधामका दर्शन कराया॥ १६॥ ✎ 1428 1429

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #1154 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ब्रह्महृदं → ब्रह्मह्रदं
  • #1428 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ब्रह्महृदमें → ब्रह्मह्रदमें
  • #1429 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ब्रह्महृदमें → ब्रह्मह्रदमें

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