श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.28.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 28 · अथाष्टाविंशोऽध्यायः

ममाप्यनुग्रहं कृष्ण कर्तुमर्हस्यशेषदृक्।

गोविन्द नीयतामेष पिता ते पितृवत्सल॥ ८

mamāpyanugrahaṃ kṛṣṇa kartumarhasyaśeṣadṛk|

govinda nīyatāmeṣa pitā te pitṛvatsala|| 8

अर्थ

गोविन्द! मैं जानता हूँ कि आप अपने पिताके प्रति बड़ा प्रेमभाव रखते हैं। ये आपके पिता हैं। इन्हें आप ले जाइये। परन्तु भगवन्! आप सबके अन्तर्यामी, सबके साक्षी हैं। इसलिये विश्‍वविमोहन श्रीकृष्ण! आप मुझ दासपर भी कृपा कीजिये॥ ८॥

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