श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.3.22

दशम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

अयं त्वसभ्यस्तव जन्म नौ गृहे

श्रुत्वाग्रजांस्ते न्यवधीत् सुरेश्‍वर।

स तेऽवतारं पुरुषैः समर्पितं

श्रुत्वाधुनैवाभिसरत्युदायुधः ॥ २२

ayaṃ tvasabhyastava janma nau gṛhe

śrutvāgrajāṃste nyavadhīt sureśvara|

sa te'vatāraṃ puruṣaiḥ samarpitaṃ

śrutvādhunaivābhisaratyudāyudhaḥ || 22

अर्थ

देवताओंके भी आराध्यदेव प्रभो! यह कंस बड़ा दुष्ट है। इसे जब मालूम हुआ कि आपका अवतार हमारे घर होनेवाला है, तब उसने आपके भयसे आपके बड़े भाइयोंको मार डाला। अभी उसके दूत आपके अवतारका समाचार उसे सुनायेंगे और वह अभी-अभी हाथमें शस्त्र लेकर दौड़ा आयेगा॥ २२॥

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