श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.3.40

दशम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

गते मयि युवां लब्ध्वा वरं मत्सदृशं सुतम्।

ग्राम्यान् भोगानभुञ्जाथां युवां प्राप्तमनोरथौ॥ ४०

gate mayi yuvāṃ labdhvā varaṃ matsadṛśaṃ sutam|

grāmyān bhogānabhuñjāthāṃ yuvāṃ prāptamanorathau|| 40

अर्थ

तुम्हें मेरे-जैसा पुत्र होनेका वर प्राप्त हो गया और मैं वहाँसे चला गया। अब सफलमनोरथ होकर तुमलोग विषयोंका भोग करने लगे॥ ४०॥

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