श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.30.24

दशम स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

एवं कृष्णं पृच्छमाना वृन्दावनलतास्तरून्।

व्यचक्षत वनोद्देशे पदानि परमात्मनः॥ २४

evaṃ kṛṣṇaṃ pṛcchamānā vṛndāvanalatāstarūn|

vyacakṣata vanoddeśe padāni paramātmanaḥ|| 24

अर्थ

परीक्षित्! इस प्रकार लीला करते-करते गोपियाँ वृन्दावनके वृक्ष और लता आदिसे फिर भी श्रीकृष्णका पता पूछने लगीं। इसी समय उन्होंने एक स्थानपर भगवान्‌के चरणचिह्न देखे॥ २४॥

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