राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! भगवान् श्रीकृष्ण सारे जगत्के एकमात्र स्वामी हैं। उन्होंने अपने अंश श्रीबलरामजीके सहित पूर्णरूपमें अवतार ग्रहण किया था। उनके अवतारका उद्देश्य ही यह था कि धर्मकी स्थापना हो और अधर्मका नाश॥ २७॥
संस्थापनाय धर्मस्य प्रशमायेतरस्य च।
अवतीर्णो हि भगवानंशेन जगदीश्वरः॥ २७
राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! भगवान् श्रीकृष्ण सारे जगत्के एकमात्र स्वामी हैं। उन्होंने अपने अंश श्रीबलरामजीके सहित पूर्णरूपमें अवतार ग्रहण किया था। उनके अवतारका उद्देश्य ही यह था कि धर्मकी स्थापना हो और अधर्मका नाश॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.33.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 336) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/33/27/