भगवान् जीवोंपर कृपा करनेके लिये ही अपनेको मनुष्यरूपमें प्रकट करते हैं और ऐसी लीलाएँ करते हैं, जिन्हें सुनकर जीव भगवत्परायण हो जायँ॥ ३७॥
अनुग्रहाय भूतानां मानुषं देहमास्थितः।
भजते तादृशीः क्रीडा याः श्रुत्वा तत्परो भवेत्॥ ३७
भगवान् जीवोंपर कृपा करनेके लिये ही अपनेको मनुष्यरूपमें प्रकट करते हैं और ऐसी लीलाएँ करते हैं, जिन्हें सुनकर जीव भगवत्परायण हो जायँ॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.33.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 337) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/33/37/