अजगरके पकड़ लेनेपर नन्दरायजी चिल्लाने लगे—‘बेटा कृष्ण! कृष्ण! दौड़ो, दौड़ो। देखो बेटा! यह अजगर मुझे निगल रहा है। मैं तुम्हारी शरणमें हूँ। जल्दी मुझे इस संकटसे बचाओ’॥ ६॥✎ 16702092
स चुक्रोशाहिना ग्रस्तः कृष्ण कृष्ण महानयम्।
सर्पो मां ग्रसते तात प्रपन्नं परिमोचय॥ ६
अजगरके पकड़ लेनेपर नन्दरायजी चिल्लाने लगे—‘बेटा कृष्ण! कृष्ण! दौड़ो, दौड़ो। देखो बेटा! यह अजगर मुझे निगल रहा है। मैं तुम्हारी शरणमें हूँ। जल्दी मुझे इस संकटसे बचाओ’॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.34.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 347) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/34/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)