श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.36.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 36 · अथ षट्त्रिंशोऽध्यायः

तमापतन्तं स निगृह्य शृङ्गयोः

पदा समाक्रम्य निपात्य भूतले।

निष्पीडयामास यथाऽऽर्द्रमम्बरं

कृत्त्वा विषाणेन जघान सोऽपतत्॥ १३

tamāpatantaṃ sa nigṛhya śṛṅgayoḥ

padā samākramya nipātya bhūtale|

niṣpīḍayāmāsa yathā''rdramambaraṃ

kṛttvā viṣāṇena jaghāna so'patat|| 13

अर्थ

भगवान्‌ने जब देखा कि वह अब मुझपर प्रहार करना ही चाहता है, तब उन्होंने उसके सींग पकड़ लिये और उसे लात मारकर जमीनपर गिरा दिया और फिर पैरोंसे दबाकर इस प्रकार उसका कचूमर निकाला, जैसे कोई गीला कपड़ा निचोड़ रहा हो। इसके बाद उसीका सींग उखाड़कर उसको खूब पीटा, जिससे वह पड़ा ही रह गया॥ १३॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें