श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.36.37

दशम स्कन्ध · अध्याय 36 · अथ षट्त्रिंशोऽध्यायः

एतज्ज्ञात्वाऽऽनय क्षिप्रं रामकृष्णाविहार्भकौ।

धनुर्मखनिरीक्षार्थं द्रष्टुं यदुपुरश्रियम्॥ ३७

etajjñātvā''naya kṣipraṃ rāmakṛṣṇāvihārbhakau|

dhanurmakhanirīkṣārthaṃ draṣṭuṃ yadupuraśriyam|| 37

अर्थ

यह सब अपनी गुप्त बातें मैंने आपको बतला दीं। अब आप जल्दी-से-जल्दी बलराम और कृष्णको यहाँ ले आइये। अभी तो वे बच्चे ही हैं। उनको मार डालनेमें क्या लगता है? उनसे केवल इतनी ही बात कहियेगा कि वे लोग धनुषयज्ञके दर्शन और यदुवंशियोंकी राजधानी मथुराकी शोभा देखनेके लिये यहाँ आ जायँ’॥ ३७॥

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