वह महान् असुर बार-बार उन्हें ले जाकर एक पहाड़की गुफामें डाल देता और उसका दरवाजा एक बड़ी चट्टानसे ढक देता। इस प्रकार ग्वालबालोंमें केवल चार-पाँच बालक ही बच रहे॥ ३०॥
गिरिदर्यां विनिक्षिप्य नीतं नीतं महासुरः।
शिलया पिदधे द्वारं चतुःपंचावशेषिताः॥ ३०
वह महान् असुर बार-बार उन्हें ले जाकर एक पहाड़की गुफामें डाल देता और उसका दरवाजा एक बड़ी चट्टानसे ढक देता। इस प्रकार ग्वालबालोंमें केवल चार-पाँच बालक ही बच रहे॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.37.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 365) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/37/30/