kiṃ nu svittatprajānāṃ vaḥ kuśalaṃ vimṛśāmahe|| 42
अर्थ
जिस इन्द्रियाराम पापीने अपनी बिलखती हुई बहनके नन्हे-नन्हे बच्चोंको मार डाला। आपलोग उसकी प्रजा हैं। फिर आप सुखी हैं, यह अनुमान तो हम कर ही कैसे सकते हैं?॥ ४२॥
योऽवधीत् स्वस्वसुस्तोकान् क्रोशन्त्या असुतृप् खलः।
किं नु स्वित्तत्प्रजानां वः कुशलं विमृशामहे॥ ४२
जिस इन्द्रियाराम पापीने अपनी बिलखती हुई बहनके नन्हे-नन्हे बच्चोंको मार डाला। आपलोग उसकी प्रजा हैं। फिर आप सुखी हैं, यह अनुमान तो हम कर ही कैसे सकते हैं?॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.38.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 373) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/38/42/