श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.39.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 39 · अथैकोनचत्वारिंशोऽध्यायः

यावदालक्ष्यते केतुर्यावद् रेणू रथस्य च।

अनुप्रस्थापितात्मानो लेख्यानीवोपलक्षिताः॥ ३६

yāvadālakṣyate keturyāvad reṇū rathasya ca|

anuprasthāpitātmāno lekhyānīvopalakṣitāḥ|| 36

अर्थ

गोपियोंको जबतक रथकी ध्वजा और पहियोंसे उड़ती हुई धूल दीखती रही तबतक उनके शरीर चित्रलिखित-से वहीं ज्यों-के-त्यों खड़े रहे। परन्तु उन्होंने अपना चित्त तो मनमोहन प्राणवल्लभ श्रीकृष्णके साथ ही भेज दिया था॥ ३६॥✎ 889

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #889 शब्दोंके बीचका स्थान: आऊँगा’यह → आऊँगा’ यह

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