श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब भगवान् श्रीकृष्णने अक्रूरजीसे इस प्रकार प्रश्न किया, तब उन्होंने बतलाया कि ‘कंसने तो सभी यदुवंशियोंसे घोर वैर ठान रखा है। वह वसुदेवजीको मार डालनेका भी उद्यम कर चुका है’॥ ८॥
पृष्टो भगवता सर्वं वर्णयामास माधवः।
वैरानुबन्धं यदुषु वसुदेववधोद्यमम्॥ ८
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब भगवान् श्रीकृष्णने अक्रूरजीसे इस प्रकार प्रश्न किया, तब उन्होंने बतलाया कि ‘कंसने तो सभी यदुवंशियोंसे घोर वैर ठान रखा है। वह वसुदेवजीको मार डालनेका भी उद्यम कर चुका है’॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.39.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 374) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/39/8/