श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.4.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

ते तु तूर्णमुपव्रज्य देवक्या गर्भजन्म तत्।

आचख्युर्भोजराजाय यदुद्वि‌ग्‍नः प्रतीक्षते॥ २

te tu tūrṇamupavrajya devakyā garbhajanma tat|

ācakhyurbhojarājāya yadudvignaḥ pratīkṣate|| 2

अर्थ

वे तुरन्त भोजराज कंसके पास गये और देवकीको सन्तान होनेकी बात कही। कंस तो बड़ी आकुलता और घबराहटके साथ इसी बातकी प्रतीक्षा कर रहा था॥ २॥

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