॥ श्रीहरिः ॥
तस्मात् सर्वात्मना राजन् ब्राह्मणान् ब्रह्मवादिनः।
तपस्विनो यज्ञशीलान् गाश्च हन्मो हविर्दुघाः॥ ४०
tasmāt sarvātmanā rājan brāhmaṇān brahmavādinaḥ|
tapasvino yajñaśīlān gāśca hanmo havirdughāḥ|| 40
अर्थ
इसलिये भोजराज! हमलोग वेदवादी ब्राह्मण, तपस्वी, याज्ञिक और यज्ञके लिये घी आदि हविष्य पदार्थ देनेवाली गायोंका पूर्णरूपसे नाश कर डालेंगे॥ ४०॥
तस्मात् सर्वात्मना राजन् ब्राह्मणान् ब्रह्मवादिनः।
तपस्विनो यज्ञशीलान् गाश्च हन्मो हविर्दुघाः॥ ४०
इसलिये भोजराज! हमलोग वेदवादी ब्राह्मण, तपस्वी, याज्ञिक और यज्ञके लिये घी आदि हविष्य पदार्थ देनेवाली गायोंका पूर्णरूपसे नाश कर डालेंगे॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.4.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 150) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/4/40/