tyaktuṃ nārhasi māṃ nātha bhaktaṃ te bhaktavatsala|| 11
अर्थ
अक्रूरजीने कहा—प्रभो! आप दोनोंके बिना मैं मथुरामें नहीं जा सकता। स्वामी! मैं आपका भक्त हूँ! भक्तवत्सल प्रभो! आप मुझे मत छोड़िये॥ ११॥✎ 2101
नाहं भवद्भ्यां रहितः प्रवेक्ष्ये मथुरां प्रभो।
त्यक्तुं नार्हसि मां नाथ भक्तं ते भक्तवत्सल॥ ११
अक्रूरजीने कहा—प्रभो! आप दोनोंके बिना मैं मथुरामें नहीं जा सकता। स्वामी! मैं आपका भक्त हूँ! भक्तवत्सल प्रभो! आप मुझे मत छोड़िये॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.41.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 387) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/41/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)