श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.42.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 42 · अथ द्विचत्वारिंशोऽध्यायः

एवं स्त्रिया याच्यमानः कृष्णो रामस्य पश्यतः।

मुखं वीक्ष्यानुगानां च प्रहसंस्तामुवाच ह॥ ११

evaṃ striyā yācyamānaḥ kṛṣṇo rāmasya paśyataḥ|

mukhaṃ vīkṣyānugānāṃ ca prahasaṃstāmuvāca ha|| 11

अर्थ

जब बलरामजीके सामने ही कुब्जाने इस प्रकार प्रार्थना की, तब भगवान् श्रीकृष्णने अपने साथी ग्वालबालोंके मुँहकी ओर देखकर हँसते हुए उससे कहा—॥ ११॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें